तन और मन को संवारता है योगः डा. समर बहादुर सिंह

जौनपुर। युवा किसी भी राष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तान्तरित करने का सबसे सशक्त माध्यम है। अपनी प्राचीनतम विरासत योग के क्रियात्मक और सैद्धांतिक पक्षों का नियमित और निरन्तर अभ्यासों को करके आज का युवा अपने भीतर सन्निहित सभी शक्तियों को जागृत कर किसी भी दिशा में अपनी ऊर्जा को लगाकर महती भूमिकाओं को निभा सकते हैं। यह बातें नगर के टीडीपीजी कालेज में छात्राध्यापकों के लिये शुरू हुए पांच दिवसीय योग प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डा. समर बहादुर सिंह ने कही। योग के क्रियात्मक एवं सैद्धांतिक पक्षों का अभ्यास पतंजलि योग समिति के प्रान्तीय सह प्रभारी अचल हरीमूर्ति और कुलदीप योगी ने कराया। उन्होंने योग के मूलभूत सिद्धांतों को बताते हुए अवस्था और रोगों के अनुसार विविध प्रकार के आसन, व्यायाम, ध्यान और प्राणायामों का अभ्यास कराकर उनसे होने वाले लाभों को बताया। श्री हरीमूर्ति ने ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासनों के साथ भस्स्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायामों के अभ्यासों को कराकर पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र और नर्वस सिस्टम पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को बताया। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डा. विनय कुमार सिंह, डा. सुधांशु सिन्हा, डा. रीता सिंह आदि उपस्थित रहे।

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