सुइथाकला, जौनपुर। आगामी दीपावली त्योहार को देखते हुए क्षेत्र के ख्यातिलब्ध पशु चिकित्सा अधिकारी डा. आलोक सिंह पालीवाल ने लोगों से कानफोड़ू पटाखों का प्रयोग न करने की सलाह दी है। डा. पालीवाल ने पशुपालकों को आगाह करते हुए कहा कि पटाखे वातावरण में ध्वनि और वायु दोनों को प्रदुषित कर दुधारू पशुओं को हानि पहुँचाते हैं। पशुओं में खास तौर पर सबसे कम सुनने की क्षमता दुधारू गायों और भैंसों में होती हैं। संवेदनशीलता के कारण कानफोड़ू पटाखों की आवाज से पशु सहम जाते हैं जिसका असर उनके दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है। पटाखों से निकलने वाले विषाक्त पदार्थ हवा मे घुलकर इनके श्वसन क्रिया को प्रभावित करते हैं। तेज आवाज वाले पटाखों से पशुओं में दुग्ध उत्पादन के साथ उनमें व्यवहार परिवर्तन और श्वास सम्बन्धी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। कभी-कभी तेज आवाज पर गर्भवती पशुओं का गर्भपात तक हो जाता है। उन्होंने लोगों से दीयों के साथ दीपावली का पर्व मनाने की अपील करते हुए पशुशालाओं से दूर पटाखे बाजी करने की सलाह दी है।
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