मादक द्रव्यों के सेवन से आते हैं नकारात्मक विचारः महापात्रा

कोविड महामारी के रोकथाम पर की गई चर्चा
जौनपुर। इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के चौथे दिन डा. दिलीप महापात्रा, चिकित्सा निदेशक, लुग मेडिकल सेंटर, आयरलैंड ने तनाव प्रबंधन और परीक्षा ब्लूज के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि तनाव से निपटना मनुष्यों में एक मौलिक जैविक तंत्र है जो सभी प्रकार के तनाव से निपटता है चाहे वह भावनात्मक हो या शारीरिक। सामान्य प्रतिक्रिया उड़ान या लड़ाई का दृष्टिकोण है जहां एक व्यक्ति या तो भागने या सामना करने और लड़ने के लिये तैयार होता है। उन्होंने कहा कि निकोटीन, शराब या मादक द्रव्यों के सेवन की लत लगातार नकारात्मक विचार लाती है। डा. माता प्रसाद राय सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी ने आयुर्वेद में स्वस्थ वृत्ति (दैनिक जीवन) के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद जीवन जीने का एक तरीका है। आयुर्वेद पूरे भारत में लोकप्रिय था और इसका पालन सतयुग, द्वापर से कलयुग तक किया गया। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी कैलिफोर्निया के डा. मलय कुमार साहू ने सार्स कोवि-2 वैश्विक महामारी की तेजी से बदलती जरूरतों के साथ मेल खाने वाले नैदानिक परीक्षणों के विकास पर बात की। माडरेशन शिवेंद्र प्रताप सिंह, किरण सिंह व शक्ति जायसवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. मानस पांडेय, प्रो. वंदना राय, डा. राशिकेश, डा. धर्मेंद्र सिंह, सृष्टि सिंह, डा. स्नेहा सिंह, डा. मुकेश कुमार, डा. मनोज मिश्रा, डा. सुनील कुमार, डा. विनय वर्मा, विजय बहार मौर्य शाहजहां, मनोज कुमार, कौशिकी सिंह आदि उपस्थित रहे।

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