छल—कपट करने वाला कभी भक्त नहीं हो सकता: प्रमोद दास

सिरकोनी, जौनपुर। छल और कपट के साथ व्यवहार करने वाले कभी प्रभु के भक्त नही हो सकते हैं। मनुष्य को भगवान के सामने निर्छल भाव से जाकर पूजा करना चाहिए।यह बातें मंगलवार को राजेपुर रामेश्वरम में स्थित वनसत्ती इंटर कालेज के प्रांगण में प्रवचन करते हुए सन्त प्रमोद दास ने कही। उन्होंने रामायण में सुपूर्णखा का वर्णन करते हुए कहा कि वह जिस रूप में थी, उस रूप में भगवान के पास नहीं गयी। वह रूप बदलकर भगवान के पास गई जिसका कारण उनका नुकसान हुआ। अगर वह अपने रूप में रहती तो प्रभु दर्शन से वह और उसका स्वभाव बदल जाता। इसके पूर्व प्रमोद दास का रमेश्वर निषाद, डॉ छोटे लाल, परमेश्वर प्रसाद, प्रभुनाथ, चंद्रजीत वर्मा आदि ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर शुशीला सिंह, निर्मला देवी, इंद्रा सिंह, राम जनम सिंह, रामचरण यादव, अनिता सिंह आदि उपस्थित रहे।

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