आयुष्मान कार्ड होते हुए भी इलाज नहीं, जौनपुर में ठेला चालक की मौत पर सवाल
जौनपुर । नाईगंज स्थित ट्यूलिप हॉस्पिटल में इलाज के दौरान ठेला चालक आफताब आलम की मौत हो गई। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले आफताब सब्जी मंडी में ठेला लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिजनों के अनुसार, आफताब लंबे समय से बीमार चल रहे थे, जिनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें बीती रात अस्पताल में भर्ती कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि आफताब के पास आयुष्मान भारत कार्ड होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया। अस्पताल की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि आयुष्मान योजना का लाभ दिन में 12 बजे के बाद ही लिया जा सकता है। आफताब की हालत लगातार गंभीर होती जा रही थी, ऐसे में परिजन इस उम्मीद में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराते रहे कि सुबह होते ही आयुष्मान कार्ड से इलाज शुरू हो जाएगा।
लेकिन सुबह होने से पहले ही आफताब ने दम तोड़ दिया। इस दौरान अस्पताल ने आईसीयू के नाम पर 25 से 30 हजार रुपये का बिल बना दिया और आयुष्मान कार्ड लेने से फिर इनकार कर दिया। मजबूरन परिजनों ने लोगों से मदद मांगकर पैसे जुटाए, अस्पताल का बिल चुकाया और आफताब को सुपुर्द-ए-खाक किया।
घटना के बाद स्वास्थ्य सेवाओं और आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि यदि आयुष्मान कार्ड समय पर स्वीकार कर लिया जाता, तो शायद आफताब की जान बचाई जा सकती थी।
अब इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से सवाल किया जा रहा है कि क्या वास्तव में ऐसा कोई नियम है, जिसके तहत रात में आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं हो सकता। यदि ऐसा कोई नियम नहीं है, तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि आफताब के परिवार से वसूली गई राशि वापस की जाए।
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हैं।

0 Comments