लोक अदालत,लैंगिक समानता के प्रति जागरूक होना जरूरी : सिविल जज सुशील सिंह
लोक अदालत व लैंगिक समानता पर जागरूकता संगोष्ठी
जौनपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जौनपुर, दीवानी न्यायालय जौनपुर एवं मोहम्मद हसन पी.जी. कॉलेज, जौनपुर के संयुक्त तत्वावधान में लैंगिक समानता, राष्ट्रीय लोक अदालत, स्थायी लोक अदालत तथा पीसीपीएनडीटी अधिनियम विषय पर एक दिवसीय जागरूकता संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में विधिक जागरूकता को सुदृढ़ करना, घटते बाल लिंगानुपात के प्रति चेतना विकसित करना तथा महिला एवं बालिका संरक्षण के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता दीवानी बार काउंसिल जौनपुर के अध्यक्ष श्री सुभाष चंद्र यादव ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा, “लैंगिक समानता केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है, जिसे हम सभी को मिलकर सशक्त करना होगा।”
मुख्य वक्ता के रूप में सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जौनपुर सुशील कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “राष्ट्रीय लोक अदालत एवं स्थायी लोक अदालत न्याय को सरल, त्वरित और किफायती बनाती हैं, जिससे आमजन को न्याय सुलभ हो पाता है।” उन्होंने पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी देते हुए भ्रूण लिंग परीक्षण को दंडनीय अपराध बताया और समाज से बालिका संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अब्दुल कादिर खाँ ने स्वागत भाषण देते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया तथा संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा, “समाज में जागरूकता और शिक्षा ही लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।” अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
डिप्टी चीफ डिफेंस काउंसिल डॉ. दिलीप सिंह ने कहा, “पीसीपीएनडीटी अधिनियम का कठोर अनुपालन समाज में संतुलित लिंगानुपात बनाए रखने की दिशा में अत्यंत आवश्यक है।”
दीवानी बार काउंसिलिंग के मंत्री उस्मान अली ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “विधिक पेशे से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि वह समाज में न्याय और समानता की भावना को सुदृढ़ करे।”
लोक अदालत सदस्य रजनी सिंह ने अपने संबोधन में कहा, “महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए सामाजिक सहभागिता अनिवार्य है।”
संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने घटते बाल लिंगानुपात पर चिंता व्यक्त करते हुए पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया तथा लोक अदालत की उपयोगिता को विस्तार से समझाया।
इस अवसर पर आयोजित खेल महोत्सव में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया और उनकी उपलब्धियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। साथ ही छात्र-छात्राओं द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए, जिनमें देशभक्ति गीत, समूह नृत्य एवं नाटक के माध्यम से सामाजिक संदेश दिया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम का संचालन अहमद अब्बास खान ने प्रभावी एवं संयोजित ढंग से किया।
कार्यक्रम में विजय श्रीवास्तव (लोक अदालत सदस्य), वरिष्ठ पत्रकार आर.पी.सिंह, डॉ. जीवन यादव, डॉ ममता सिंह,डॉ. नीलेश सिंह,अभिषेक श्रीवास्तव, डॉ. संतोष सिंह, प्रवीण यादव, तकरीम फातमा,आदिति मिश्रा,अंकित यादव, उमरा खान, फरहीन बानो सहित महाविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का गरिमामय समापन किया गया।

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