जौनपुर में सपा की बड़ी चाल! अचानक एक्टिव हुए अमीक जामेई, क्या इशारा दे रहे हैं अखिलेश यादव?
आरिफ़ हुसैनी
जौनपुर । ज़िले सियासत में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है अमीक जामेई जिनका पूरा नाम अमीक़ खान है पर जामिया मिललिया इस्लामिया से शिक्षा लेने से जामेई लगाते है, वो जैगहाँ मे जन्मे जिनका परिवार मे भारतीय फ़ौज मे बड़ी क़ुर्बानिया रही है, पिछले एक महीने से जौनपुर सदर विधानसभा में उनकी लगातार सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। गांव-गांव पहुंचना, छोटे-बड़े कार्यक्रमों में शामिल होना और समाजवादी विचारधारा को जमीन पर मजबूत करना ये सब संकेत किसी सामान्य दौरे के नहीं माने जा रहे। दरअसल, अमीक जामेई सिर्फ एक प्रवक्ता नहीं, बल्कि अखिलेश यादव के भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते हैं ।
वो अखिलेश यादव की रणनीतिक विज़न डॉक्यूमेंट टीम का भी हिस्सा है जिस टीम का नेतृत्व पूर्व IAS चीफ सेक्रेटरी श्री अलोक रंजन करते है ऐसे में उनका अपने गृह क्षेत्र जौनपुर सदर में इस तरह से जमकर एक्टिव होना कई सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है की 2022 मे सपा सुप्रीमो अमिक जामेई को लड़ाना तय था परिस्थिति अनुकूल न होने से टिकट बदलना पड़ा उसके बावजूद अमीक़ ने ज़िलें मे ईमानदारी से पार्टी को चुनाव लड़ाया और सपा सुप्रीमो के आदेशों का पालन किया
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमीक़ का क्षेत्र मे एक्टिव होना महज संगठनात्मक मजबूती का प्रयास नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। जौनपुर सदर सीट हमेशा से राजनीतिक रूप से अहम रही है, और यहां पर सपा का मजबूत चेहरा उतारने की जरूरत पार्टी लंबे समय से महसूस कर रही है।
गौरतलब है की अमीक़ सामाजिक न्याय के मैदान मे देश का बड़ा चेहरा है चाहे वो रोहित वेमुला आंदोलन मे दिल्ली हाई कोर्ट मे उनकी हत्या का प्रयास, एंटी CAA आंदोलन का उत्तर प्रदेश मे नेतृत्व, बटला हाउस फेक एनकाउंटर के खिलाडी लड़ाई, शिया सुन्नी जॉइंट नमाज़ जिसे शोल्डर टू शोल्डर की बुनियाद रखना और टेलीवीज़न डिबेट मे अमीक़ सत्ता के शीर्ष प्रवक्ताओ को पानी पीलाते देखे गए है
अमीक जामेई का स्थानीय होना, सामाजिक न्याय की समझ, जमीनी पकड़ और सीधे शीर्ष नेतृत्व से जुड़ाव उन्हें एक मजबूत संभावित उम्मीदवार के रूप में पेश करता है। यही वजह है कि उनके हर कार्यक्रम को अब राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
सवाल अब यह है कि क्या अखिलेश यादव जौनपुर सदर सीट पर कोई बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं? अगर अमीक जामेई को यहां से उम्मीदवार बनाया जाता है, तो यह न सिर्फ स्थानीय समीकरण बदलेगा, बल्कि विपक्षी दलों के लिए भी चुनौती बन सकता है।
विपक्ष भी सतर्क
अमीक की सक्रियता ने सिर्फ सपा कार्यकर्ताओं को ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों को भी अलर्ट कर दिया है। जौनपुर में राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज होना इस बात का संकेत है कि आने वाला चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो सकता है, जहाँ एक तरफ अमीक़ की सपा सुप्रीमो से नज़दीकी से जौनपुर को उम्मीद है की जौनपुर की क़िस्मत बदल सकती है वहा इंटर्नल उनका शीर्ष पूर्वांचल नेतृत्व भी उनके खिलाफ सक्रिय दीखता है
जनता क्या कहती है?
स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा आम हो गई है कि “कुछ बड़ा होने वाला है।” लगातार संपर्क, जनसुनवाई और जमीनी मुद्दों पर फोकस ये सब उन्हें जनता के करीब ला रहा है।
जौनपुर सदर में अमीक जामेई की बढ़ती सक्रियता सिर्फ एक राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी पटकथा का पहला अध्याय लग रही है। अब देखना यह है कि क्या यह रणनीति सच में चुनावी टिकट तक पहुंचती है या फिर यह सिर्फ संगठन मजबूत करने की कवायद है,लेकिन एक बात तय है जौनपुर की सियासत अब शांत नहीं रहने वाली ।

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