अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, 40 हजार रुपये मुआवजे का आदेश

अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, 40 हजार रुपये मुआवजे का आदेश
पुलिस अधिकारियों की सेवा पुस्तिका में दर्ज होगी कोर्ट की नाराजगी, वेतन से होगी मुआवजे की वसूली

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को 40 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह राशि संबंधित पुलिस अधिकारियों के वेतन से वसूलने तथा उनकी सर्विस बुक में न्यायालय की नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका संख्या 906/2026 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने 9 सितंबर 2026 को पारित किया। मामले में अधिवक्ता रवि प्रकाश ने पक्ष रखा।

याचिका के अनुसार, 23 जून 2026 को ग्राम देवरिया, थाना बदलापुर निवासी अरविंद यादव पुत्र अभयराज यादव को जार्ज टाउन पुलिस पूछताछ के नाम पर घर से ले गई थी। आरोप है कि उन्हें करीब चार दिनों तक थाने में रखा गया। मामले में थाना जार्ज टाउन के तत्कालीन थानाध्यक्ष योगेंद्र सिंह और विवेचक एसआई अश्वनी सविता की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे।

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य तथ्यों के आधार पर व्यक्ति के चार दिनों तक थाने में मौजूद रहने की बात सामने आई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी निर्दोष व्यक्ति को केवल किसी आरोपी पर दबाव बनाने या पूछताछ के नाम पर थाने में बैठाकर रखना कानूनन उचित नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस की ऐसी कार्रवाई व्यक्ति के स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 40 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया, साथ ही संबंधित अधिकारियों से उक्त राशि की वसूली उनके वेतन से किए जाने और उनकी सेवा पुस्तिका में न्यायालय की नाराजगी दर्ज करने का आदेश दिया।

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